Sunday, May 10, 2020

ड्यूटी ने बांधे हाथ, दो साल के बेटे का चेहरा 25 दिन से नहीं देखा

दिल्ली के एक अस्पताल में कैट्स एंबुलेंस में ड्राइवर अमित चौधरी इन दिनों दिन-रात काम कर रहे हैं। वह कहते हैं इससे पहले कभी इतनी थकान नहीं हुई। 2 साल के बेटे को देखने के लिए भी आंखें तरस जाती हैं, पर पहले ड्यूटी जरूरी है।



प्रियंका सिंह, हरि नगर
डीडीयू अस्पताल के मुख्य गेट पर एंबुलेंस की गाड़ी के सामने खड़े एक व्यक्ति का फोन बजता है। वह जल्दी से पीपीई पहनता है और सायरन बजाते हुए कैट्स एंबुलेंस अस्पताल के गेट से निकल जाती है। जब उनसे बात की गई, तो उन्होंने अपना नाम अमित चौधरी बताया। वह कैट्स एंबुलेस में ड्राइवर की पोस्ट पर कार्यरत है। जब से लॉकडाउन हुआ है, तब से वह दिन-रात काम कर रहे हैं।

अमित चौधरी से जब पूछा गया कि इस महामारी के दौर में जहां एक तरफ लोग खुद को घर में बंद किए हुए हैं। वहां पर इस तरह कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों को लाते हैं तो डर नहीं लगता। इस पर उनका कहना था कि डर लगता है, लेकिन काम तो करना है और अगर डर की वजह से हर कोई काम करने से मना कर देगा तो कौन करेगा। अमित बताते हैं कि वह चार साल से एंबुलेस चला रहे हैं। मगर इतना डर और थकान कभी महसूस नहीं हुई। एक दिन के तकरीबन 5 से 6 कॉल आ जाती हैं। ऐसे में हर मरीज को लाने के बाद एंबुलेस सैनिटाइज की जाती है और हम भी अपनी तरफ से पूरी सावधानी रखते हैं।



बहरहाल, राजस्थान से ताल्लुक रखने वाले अमित नौकरी की तलाश में दिल्ली आए थे। घर में एक ही कमाने वाले हैं। पूरे परिवार में 5 सदस्य हैं, जिनकी जिम्मेंदारी उन पर है। अमित की माने तो लॉकडाउन से पहले ही अपने घर गए थे। तभी सबसे मिलकर आए थे। अब सिर्फ फोन पर ही बात होती है। 25 दिन हो गए हैं, दो साल के बेटे का चेहरा नहीं देखा है। उन्होंने बताया कि घर की जिम्मेदारी भी है। बहन की पढ़ाई से लेकर शादी और बच्चें को एक अच्छा भविष्य देना है। ताकि वो बड़ा होकर कोई अफसर बने। इसलिए दिन-रात मेहनत करता हूं। ताकि जब वो पढ़ने-लिखने के काबिल हो, तब पैसे की कोई कमी ना हो।

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